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भारत का विदेशी निवेश और बाहरी निवेश का अंतर घटा
भारतीय रिज़र्व बैंक की वार्षिक जनगणना के अनुसार, भारत में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और भारतीय कंपनियों के विदेशों में निवेश के बीच का अनुपात वित्त वर्ष 2026 में घटकर 4.2 गुना रह गया है। पहले यह अनुपात 5.5 गुना था।
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भारतीय रिज़र्व बैंक की ताज़ी रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किया गया है। भारत में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए जाने वाले निवेश (ओडीआई) के बीच का अंतर लगातार कम हो रहा है। वित्त वर्ष 2026 में यह अनुपात 4.2 गुना रह गया है, जो पिछले साल के 5.5 गुना से निचले स्तर पर है।
यह आंकड़े भारतीय कंपनियों की बढ़ती वैश्विक महत्वाकांक्षा और विदेश में निवेश बढ़ाने की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। साथ ही, भारत में आने वाले विदेशी निवेश की गति में भी बदलाव दिख रहा है। रिज़र्व बैंक की वार्षिक जनगणना में इन रुझानों को विस्तार से प्रलेखित किया गया है।
आरबीआई के डेटा के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका भारत में सबसे बड़ा विदेशी निवेशक बना हुआ है। अमेरिका भारत में कुल बकाया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में शीर्ष स्थान पर है। यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों की मजबूत नींव को प्रदर्शित करता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के वैश्विक एकीकरण में ये बदलाव महत्वपूर्ण हैं। भारतीय उद्यमों की विदेशों में सक्रिय भूमिका बढ़ रही है, जबकि विदेशी पूंजी भी भारत में लगातार आकर्षित हो रही है। इससे भारत की द्विपक्षीय निवेश गतिविधि अधिक संतुलित होती दिख रही है।