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भारत का आईपीओ बाजार तेजी से बढ़ा: 999 कंपनियों ने जुटाए 9.83 लाख करोड़ रुपये
2002 के बाद से भारतीय शेयर बाजार में आईपीओ गतिविधि में असाधारण वृद्धि देखी गई है। 2022-23 में मंदी के बाद 2024-25 में यह गतिविधि फिर से तेजी से बढ़ने लगी है।
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भारत का प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव बाजार पिछले दो दशकों में अभूतपूर्व विकास का साक्षी रहा है। वर्ष 2002 से लेकर अब तक 999 कंपनियों ने सार्वजनिक बाजार में आकर कुल 9.83 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई है। यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था में उद्यमशीलता और निवेश में आने वाली प्रवृत्ति को दर्शाता है।
आईपीओ बाजार की यह यात्रा समरूप नहीं रही है। पिछले कुछ वर्षों में बाजार में उतार-चढ़ाव देखे गए हैं, विशेषकर 2022 और 2023 में आईपीओ गतिविधि में स्पष्ट संकुचन दिखाई दिया। वैश्विक आर्थिक स्थितियों और बाजार की अस्थिरता के कारण इस अवधि में नई कंपनियों की सूची बनवाने की रुचि घट गई थी।
हालांकि, 2024 और 2025 में बाजार में पुनः उत्साह देखा जा रहा है। आईपीओ गतिविधि में यह नई ऊर्जा निवेशकों और कंपनियों दोनों के आत्मविश्वास को दर्शाती है। विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद और विस्तारशील बाजार इस पुनरुत्थान के मुख्य कारण हैं।
आने वाले समय में आईपीओ बाजार की गतिविधि और भी तेजी से बढ़ने की संभावना है। नई प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और पारंपरिक क्षेत्रों से आने वाली कंपनियों के साथ सार्वजनिक बाजार में प्रवेश करने की रुचि बढ़ रही है। यह विकास भारत की पूंजी बाजार को वैश्विक पटल पर अधिक शक्तिशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।