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कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भारत का आउटसोर्सिंग उद्योग मजबूत बना हुआ है
भारत का सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात अब सकल घरेलू उत्पाद का 5.2 प्रतिशत बन गया है, जो महामारी से पहले 3.3 प्रतिशत था। व्यावसायिक सेवाओं का हिस्सा दोगुने से अधिक बढ़कर 3.3 प्रतिशत हो गया है।
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भारत का आउटसोर्सिंग क्षेत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आगमन के बीच भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने में सफल रहा है। सॉफ्टवेयर सेवा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि देश की अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष योगदान बढ़ाने का संकेत दे रही है। कोविड-19 महामारी से पहले यह क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद का 3.3 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गया है।
व्यावसायिक सेवा क्षेत्र में भी समान गति से विस्तार हुआ है। इस खंड का योगदान पिछले वर्षों में दोगुने से अधिक बढ़ा है और वर्तमान में 3.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह वृद्धि भारतीय कंपनियों की विश्व बाजार में बढ़ती मांग और उनकी सेवाओं के प्रति आस्था को दर्शाती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के विकास के बावजूद भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियां नए कौशल और सेवाओं में निवेश करके अपनी बाजार स्थिति को मजबूत कर रही हैं। इस रणनीति से वैश्विक व्यावसायिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षमता बढ़ी है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत का तकनीकी और व्यावसायिक सेवा क्षेत्र वर्तमान डिजिटल परिवर्तन के काल में न केवल टिकाऊ है, बल्कि लगातार विकास पा रहा है। इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की संभावना है।