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सस्ते ड्रोन से निपटने के लिए सस्ते इंटरसेप्टर की जरूरत

सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए भारत को ऐसे प्रणालियों की आवश्यकता है जो किफायती हों और बार-बार उपयोग के लिए विश्वसनीय हों। सस्ते ड्रोन तकनीक के तेजी से प्रसार ने रक्षा रणनीति में नया संकट खड़ा कर दिया है।

LSN India · 15 October 2026

सस्ते ड्रोन से निपटने के लिए सस्ते इंटरसेप्टर की जरूरत

सैन्य और रक्षा विशेषज्ञों के लिए एक नई चुनौती सामने आई है। सस्ते ड्रोन तकनीक के तेजी से विकास और उपलब्धता के कारण सेनाओं को ऐसे इंटरसेप्टर सिस्टम विकसित करने की जरूरत है जो न केवल प्रभावी हों बल्कि बार-बार उपयोग के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य भी हों।

पारंपरिक रक्षा प्रणालियां मूल्य के लिहाज से अत्यंत महंगी हैं। जब हर बार किसी अनिच्छुक ड्रोन को मार गिराने के लिए लाखों रुपये की मिसाइल खर्च करनी पड़े, तो यह रणनीति दीर्घकालीन रक्षा के लिए टिकाऊ नहीं रही। सैन्य ठिकानों, सीमावर्ती इलाकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की निरंतर सुरक्षा के लिए लागत-प्रभावी समाधान अपरिहार्य हो गया है।

इस समस्या का समाधान दो मुख्य मानदंडों पर निर्भर करता है: सस्तापन और विश्वसनीयता। नए इंटरसेप्टर सिस्टम को न केवल सस्ते होने चाहिए बल्कि कई बार उपयोग के लिए पर्याप्त मजबूत भी होने चाहिए। भारत समेत क्षेत्रीय देशों को इस दिशा में आत्मनिर्भर तकनीकी समाधान विकसित करने की आवश्यकता है।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक सैन्य मुद्दा नहीं है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। भविष्य की सुरक्षा संरचना तभी प्रभावी होगी जब वह आधुनिक खतरों से निपटने के लिए तैयार हो और साथ ही दीर्घकालीन आर्थिक बोझ को भी कम रखे।