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बड़े एनबीएफसी मजबूत हुए, लेकिन जोखिम बने हुए हैं
फिच रेटिंग्स के विश्लेषकों का मानना है कि बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां 2019 के बाद से मजबूत हुई हैं। हालांकि, परिवारों के बढ़ते कर्ज, तेजी से क्रेडिट वृद्धि और सोने के ऋण के जोखिम पर नजर रखने की जरूरत है।
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फिच रेटिंग्स की विश्लेषक एलेन कोह के अनुसार, भारत की बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) पिछले चार वर्षों में अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार लाई हैं। 2019 के बाद से इन संस्थानों ने अपनी पूंजीगत संरचना को मजबूत किया है और जोखिम प्रबंधन में सुधार दिखाया है। बड़ी एनबीएफसी अब अधिक स्थिर आधार पर संचालित हो रही हैं।
हालांकि, बाजार में कई ऐसे संकेत दिख रहे हैं जो चिंता का कारण बन सकते हैं। परिवारों की ओर से उधार लेने की प्रवृत्ति में वृद्धि देखी जा रही है, जिससे घरेलू क्षेत्र में लीवरेज का स्तर बढ़ रहा है। साथ ही, क्रेडिट बाजार में तेजी से वृद्धि भी टिकाऊ नहीं साबित हो सकती।
विश्लेषकों के अनुसार, सोने के ऋण देने के क्षेत्र में भी गहन निगरानी की आवश्यकता है। यह क्षेत्र तेजी से विस्तार पा रहा है, लेकिन इससे जुड़े जोखिमों का सही मूल्यांकन जरूरी है। नियामक प्राधिकार और वित्तीय संस्थानों को इन उभरते जोखिमों पर सतर्क रहना चाहिए।
अग्रणी एनबीएफसी की आंतरिक शक्ति के बावजूद, समग्र वित्तीय क्षेत्र में संतुलित वृद्धि सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में परिवारों के बढ़ते कर्ज का प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए सावधानीपूर्वक निरीक्षण आवश्यक है।