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बैंकिंग सेवा नेटवर्क संकट में: एजेंटों के लिए उचित मुआवजे की मांग

अंतिम-मील बैंकिंग नेटवर्क बढ़ती लागत और कम कमीशन से जूझ रहा है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट एजेंटों को न्यायसंगत पारिश्रमिक संरचना मिलनी चाहिए।

LSN India · 1 November 2026

बैंकिंग सेवा नेटवर्क संकट में: एजेंटों के लिए उचित मुआवजे की मांग

भारत के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में वित्तीय सेवाएं पहुंचाने वाले बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक दबाव और अपर्याप्त कमीशन संरचना के कारण इन अंतिम-मील सेवा प्रदाताओं की स्थिति बिगड़ती जा रही है, जिससे सेवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय समावेशन के लिए बनाई गई रणनीति दस्तावेज (2025-2030) में स्पष्ट रूप से इस बात पर जोर दिया गया है कि बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट एजेंटों के लिए एक न्यायसंगत और उचित पारिश्रमिक ढांचा आवश्यक है। यह संरचना ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवा वितरण की गुणवत्ता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

वर्तमान समय में बढ़ती परिचालन लागत के बीच एजेंटों द्वारा प्राप्त कमीशन अपर्याप्त रह गया है। इससे अनुभवी कार्मिकों का पलायन हो रहा है और नई प्रतिभा को आकर्षित करना मुश्किल हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

नीति निर्माताओं से अपेक्षा की जा रही है कि वे बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट मॉडल को मजबूत करने के लिए एक व्यवहार्य मुआवजा संरचना तैयार करें। इससे न केवल वर्तमान नेटवर्क को स्थिर किया जा सकेगा, बल्कि भविष्य में इसका विस्तार भी संभव हो सकेगा।