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मानसून सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम बारिश के साथ संपन्न
भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून बुधवार को समाप्त हुआ, जिसमें सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। यह 2001 के बाद से चौथी सबसे कम बारिश है।
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भारत में मानसून ऋतु समाप्त होने के साथ देश को अपेक्षा से काफी कम वर्षा मिली है। जून से सितंबर के दौरान भारत में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो दीर्घकालीन सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम है।
यह वर्षा स्तर पिछले दो दशक में चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है। 2001 के पश्चात से यह केवल चौथी बार है जब भारत में इतनी कम मानसूनी बारिश दर्ज की गई है। कृषि और जल संसाधन पर मानसून की कमजोर कार्यप्रणाली के प्रभाव दिखने की संभावना है।
मानसून का यह प्रदर्शन कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। देश के विभिन्न हिस्सों में समान वर्षा का वितरण नहीं हुआ, जिससे कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियां बनी हैं। जलाशयों के स्तर और भूजल संचयन पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
कृषकों और नीति निर्माताओं के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि मानसून देश की कुल वार्षिक बारिश का लगभग 70 प्रतिशत प्रदान करता है। आने वाले महीनों में कृषि उत्पादन और पानी की उपलब्धता से संबंधित समस्याओं की निगरानी करना आवश्यक हो गया है।