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एल नीनो के प्रभाव से भारत में एक दशक में सबसे कम मानसून वर्षा
एल नीनो जलवायु पैटर्न के कारण भारत को इस वर्ष मानसून में दशकों में सबसे कम वर्षा का सामना करना पड़ रहा है। कृषि और जल संसाधनों पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
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भारत को चालू मानसून मौसम में एक दशक से अधिक समय में सबसे कम वर्षा का अनुभव हो रहा है। विश्व के उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर क्षेत्र में असामान्य रूप से गर्म जल के कारण विकसित होने वाले एल नीनो मौसम पैटर्न को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
मई से सितंबर के बीच होने वाली इस महत्वपूर्ण मानसून अवधि में वर्षा की कमी से देश की कृषि गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर है, और वर्षा में यह कमी किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है।
जलाशयों में जल स्तर में गिरावट से सिंचाई संभावनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। एल नीनो के कारण भारत-प्रशांत क्षेत्र में मौसम के पैटर्न में व्यापक परिवर्तन हो रहा है, जिससे वर्षा वितरण में असमानता दिख रही है।
मौसम विशेषज्ञ आने वाले सप्ताहों में मानसून गतिविधि में सुधार की संभावना व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन वर्ष भर के लिए कुल वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है। सरकारी एजेंसियां जल संरक्षण और कृषि सहायता उपायों को तेज करने के लिए तैयार हो गई हैं।