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26 लाख से अधिक एमएसएमई में स्वच्छ उत्पादन की विशाल संभावना

भारत के लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन तकनीकों को अपनाने की बड़ी गुंजाइश है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में निवेश और नीतिगत समर्थन से देश का औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।

LSN India · 19 September 2026

26 लाख से अधिक एमएसएमई में स्वच्छ उत्पादन की विशाल संभावना

भारत में 26 लाख से अधिक पंजीकृत एमएसएमई हैं जो देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। औद्योगिक विशेषज्ञों के अनुसार, ये उद्यम स्वच्छ और टिकाऊ उत्पादन प्रक्रियाएं अपनाने के लिए तैयार हैं। यदि सही तरीके से नीति निर्माण और तकनीकी सहायता दी जाए, तो ये छोटे और मध्यम आकार के कारोबार हरित औद्योगिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पर्यावरण और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों का सुझाव है कि एमएसएमई क्षेत्र को स्वच्छ उत्पादन तकनीकों में रूपांतरण के लिए वित्तीय और तकनीकी प्रोत्साहन की आवश्यकता है। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि इन उद्यमों की दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता में भी सुधार आएगा।

स्वच्छ उत्पादन प्रक्रियाएं अपनाने से कचरे में कमी, ऊर्जा की बचत और उत्पादन लागत में कटौती संभव है। यह एमएसएमई को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकता है। साथ ही, सरकारी नीतियों और पर्यावरणीय मानदंडों का अनुपालन भी आसान हो सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के एमएसएमई के विशाल नेटवर्क को सही दिशा देने से भारत जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने में सफल हो सकता है। इसके साथ ही, देश के औद्योगिक क्षेत्र में अधिक रोजगार के सुयोग भी उत्पन्न होंगे।