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पेरिस ओलंपिक में भारत का सीमित प्रतिनिधित्व, पदक जीतने के अवसर खोए
भारत पेरिस 2024 ओलंपिक में महज 21 प्रतिशत पदक स्पर्धाओं में भाग ले सका, जबकि अमेरिका 80 प्रतिशत में सक्रिय रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि खेलों के प्रति सीमित निवेश और बुनियादी ढांचे की कमी भारत की ओलंपिक सफलता में बाधक बन रही है।
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पेरिस ओलंपिक में भारत की उपस्थिति मेडल जीतने के संभावित अवसरों को नजरअंदाज करने का स्पष्ट संकेत देती है। भारतीय दल द्वारा केवल 21 प्रतिशत मेडल ईवेंट्स में प्रतिभाग विश्व के शीर्ष खेल राष्ट्रों की तुलना में बेहद कम है। इसके विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका 80 प्रतिशत पदक स्पर्धाओं में प्रतिनिधित्व करके अपनी व्यापक खेल नीति और संसाधनों का प्रदर्शन करता है।
विश्लेषकों के अनुसार, भारत की इस सीमित भागीदारी के पीछे खेल विकास के लिए अपर्याप्त वित्तीय आवंटन और प्रशिक्षण केंद्रों में विषमताएं प्रमुख कारण हैं। तकनीकी खेलों तथा कम लोकप्रिय स्पर्धाओं में भारतीय एथलीटों की कमी विश्व मंच पर देश की प्रतिस्पर्धी क्षमता को सीमित कर रही है। कई संभावित मेडल जीतने वाली स्पर्धाएं ऐसी हैं जिनमें भारत की कोई प्रविष्टि ही नहीं रही।
आने वाले ओलंपिक खेलों में भारत की सफलता सुनिश्चित करने के लिए खेल अवसंरचना और कोचिंग में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। पड़ोसी देशों और विकसित राष्ट्रों के समान व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाकर भारत अधिक विविध खेलों में पदक विजेता तैयार कर सकता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धिता बढ़ाने के लिए युवा प्रतिभा की पहचान और उनके विकास में निवेश करना अपरिहार्य है।