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जून में LRS के तहत विदेशी रेमिटेंस 20% बढ़कर 2.5 अरब डॉलर हुए
भारतीय रिज़र्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेशी निवेश में वृद्धि के कारण जून में भारतीयों की विदेशी रेमिटेंस में उल्लेखनीय उछाल आया है। इक्विटी और डेट निवेश संबंधी रेमिटेंस साल दर साल दोगुना होकर 456.7 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।
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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि जून के महीने में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत आउटवर्ड रेमिटेंस में 20 फीसदी की तेजी आई है। इस अवधि में कुल रेमिटेंस 2.5 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछली तुलनीय अवधि की तुलना में काफी अधिक है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से विदेशी यात्रा और अंतरराष्ट्रीय निवेश गतिविधियों में आई तेजी के कारण हुई है। भारतीय निवेशकों की विदेशी बाजारों में निवेश की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है, जिसका सकारात्मक प्रभाव रेमिटेंस आंकड़ों में नजर आ रहा है।
इक्विटी और ऋण संबंधी निवेश रेमिटेंस में विशेष रूप से उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जून में यह रेमिटेंस 456.7 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में दोगुना है। यह वृद्धि भारतीय निवेशकों के विदेशी बाजारों में आत्मविश्वास को दर्शाती है।
भारतीय नागरिकों को LRS (Liberalized Remittance Scheme) के तहत वर्ष में 250,000 डॉलर तक विदेशों में भेजने की अनुमति है। इस योजना के तहत विदेशी निवेश, यात्रा, शिक्षा और अन्य वैध उद्देश्यों के लिए धन भेजा जा सकता है। वर्तमान वृद्धि के रुझान से संकेत मिलता है कि भारतीय पूंजी विदेशी बाजारों में तेजी से प्रवेश कर रही है।