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भारतीय फार्मा सेक्टर में नियामक क्षमता की कमी बनी बाधा

भारत की दवा उद्योग महत्वाकांक्षाओं को नियामकीय क्षमता की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए बायोफार्मा शक्ति कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण सुधार की घोषणा की है।

LSN India · 20 August 2026

भारतीय फार्मा सेक्टर में नियामक क्षमता की कमी बनी बाधा

भारत की दवा उद्योग के विकास को बाधित करने वाली एक बड़ी समस्या सामने आई है - केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की नियामकीय क्षमता में कमी। इस मुद्दे को हल करने के लिए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये की बायोफार्मा शक्ति (शक्तिशाली विकास के लिए भारत हेतु कौशल और प्रौद्योगिकी) योजना के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण सुधार किया है।

इस सुधार के तहत सीडीएससीओ के भीतर एक समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा दल गठित किया जाएगा। यह कदम भारतीय फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था दवा अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करेगी और विदेशी बाजारों में भारतीय दवाओं की पहुंच बढ़ाएगी। सीडीएससीओ में विशेषज्ञ कर्मचारियों की कमी लंबे समय से भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए एक बड़ी बाधा रही है।

इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियामकीय सुधार भारत को वैश्विक फार्मास्यूटिकल बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा दल के माध्यम से आवेदनों की प्रक्रिया को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाया जाएगा।