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भारत की विदेश नीति पड़ोसी देशों पर निर्भरता का जाल बुन रही है
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की राजनीतिक रणनीति पाकिस्तान और बांग्लादेश को घरेलू राजनीति में प्रभाव डालने का मौका दे रही है। इस दृष्टिकोण से भारत की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है।
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भारत की विदेश नीति और घरेलू राजनीति का आपस में जुड़ाव एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन गया है। राजनीतिक दल अपने लाभ के लिए क्षेत्रीय तनावों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पड़ोसी देशों को भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप का अवसर मिल जाता है। यह रणनीति अल्पकालिक लाभ तो दे सकती है, लेकिन दीर्घकालिक में राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब घरेलू राजनीति में पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुद्दों का अत्यधिक इस्तेमाल होता है, तो ये देश भारत की आंतरिक विभाजन का लाभ उठाते हैं। इससे भारत की वार्ताकारी शक्ति कमजोर होती है और क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित होती है। साथ ही, राजनीतिक दलों द्वारा अपनी जनता के सुरक्षा संबंधी डर का दोहन करने से राष्ट्रीय एकता भी खतरे में पड़ती है।
भारतीय राजनीति को इस दुश्चक्र से बाहर निकलने के लिए एक सुविचारित और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को राजनीतिक लाभ का साधन बनाने की बजाय, राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देना चाहिए। यह भारत को न केवल क्षेत्रीय मामलों में मजबूती देगा, बल्कि भारतीय लोकतंत्र को भी सुदृढ़ करेगा।