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भारत में गरीबी में तेजी से गिरावट, लेकिन वेतन असमानता बनी रहीं
2011 से 2023 के बीच भारत ने 49.6 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है, जो तेजी से विकास को दर्शाता है। हालांकि, शीर्ष 10 प्रतिशत कर्मचारी निचले स्तर के कर्मचारियों से 13 गुना अधिक कमाते हैं।
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भारत ने पिछले दशक में गरीबी दूर करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। 2011 से 2023 के बीच लगभग 49.6 करोड़ व्यक्तियों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे तेजी से गरीबी में कमी का संकेत है।
इस दौरान राष्ट्र की आर्थिक वृद्धि और बेहतर सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का प्रभाव स्पष्ट दिखा है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में गरीबी में गिरावट देखी गई है, जो आर्थिक विकास के लाभ विभिन्न वर्गों तक पहुंचे हैं।
लेकिन इस सकारात्मक विकास के बावजूद, आय और वेतन असमानता में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। आंकड़ों से पता चलता है कि कार्यबल के शीर्ष 10 प्रतिशत कर्मचारी निचले 10 प्रतिशत कर्मचारियों की तुलना में 13 गुना अधिक वेतन अर्जित करते हैं।
यह वेतन अंतराल अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक असमानताओं को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कौशल विकास, शिक्षा और नियोजन में निवेश बढ़ाकर इस अंतराल को कम किया जा सकता है। भारत के लिए यह चुनौती है कि वह आर्थिक विकास के साथ-साथ आय असमानता में भी कमी लाए।