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सार्वजनिक प्रशासन संकटकालीन दौर में; तेज और नागरिक-केंद्रित शासन जरूरी: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने सार्वजनिक प्रशासन को महत्वपूर्ण मोड़ पर बताया है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रणाली को तेजी से काम करना चाहिए और नागरिकों की जरूरतों को केंद्र में रखना चाहिए।
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उपराष्ट्रपति ने देश के सार्वजनिक प्रशासन तंत्र को एक महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश करते हुए माना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में सरकारी व्यवस्था को अधिक कुशल, जवाबदेही वाली और नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाली होनी चाहिए।
सार्वजनिक प्रशासन सुधार के संदर्भ में उपराष्ट्रपति का यह बयान राष्ट्रीय प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित करता है। उन्होंने माना है कि आधुनिक भारत के लिए नई प्रशासनिक नीतियों और कार्यप्रणाली की आवश्यकता है जो आम जनता के लिए सेवाएं तेजी से और प्रभावी ढंग से प्रदान कर सके।
उपराष्ट्रपति के विचार में सरकारी कार्यालयों को पारदर्शिता, समयबद्धता और लोक-सेवा की भावना के साथ काम करना चाहिए। वे मानते हैं कि यदि प्रशासनिक व्यवस्था नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाएं तो शासन की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
इस बदलाव के लिए उपराष्ट्रपति ने संस्थागत और संरचनात्मक सुधारों पर जोर दिया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि प्रशासकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए और प्रौद्योगिकी का समुचित उपयोग करते हुए नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाई जाएं।