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मानसून में देरी और सेवा क्षेत्र में मंदी से Q1 में GDP वृद्धि घटकर 7.2% रह सकती है
भारत की आर्थिक वृद्धि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में घटकर 7.2% रह सकती है, जो पिछले चार तिमाहियों में सबसे कम होगी। देशव्यापी सेवा क्षेत्र की मंद गति और मानसून में देरी इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
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भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में आने वाली तिमाही में गिरावट की संभावना है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि 7.2 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है, जो पिछली चार तिमाहियों में सबसे कम आंकड़ा होगा।
यह धीमापन मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में कमजोरी के कारण आ रहा है। साथ ही, इस साल मानसून की विलंबित शुरुआत ने कृषि और संबंधित गतिविधियों को प्रभावित किया है। बारिश में यह देरी खरीफ फसलों की बुवाई को प्रभावित करने की स्थिति में है।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू मांग की मजबूत गति अर्थव्यवस्था को पूरी तरह गिरने से बचा रही है। उपभोक्ता खपत और निवेश में दिखाई दे रही ताकत से अर्थव्यवस्था को आंशिक सहारा मिल रहा है।
मानसून की स्थिति में सुधार होने और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद से अर्थशास्त्री आने वाली तिमाहियों में बेहतर विकास दर की संभावना देख रहे हैं।