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भारत की अनुसंधान क्षमता वैश्विक विनिर्माण को नई गति दे सकती है
रॉकवेल ऑटोमेशन के वित्त प्रमुख क्रिश्चियन रोथे का मानना है कि भारत की मजबूत अनुसंधान और विकास क्षमता उन्नत विनिर्माण, स्वचालन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को आगे बढ़ा सकती है।
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भारत की मजबूत अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) क्षमता को वैश्विक स्तर पर विनिर्माण क्षेत्र को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण हथियार माना जा रहा है। रॉकवेल ऑटोमेशन के मुख्य वित्त अधिकारी क्रिश्चियन रोथे के अनुसार, भारत के पास उन्नत विनिर्माण तकनीकों और स्वचालन समाधानों को विकसित करने की वास्तविक क्षमता है।
रोथे का मत है कि भारत की इस शक्तिशाली अनुसंधान और विकास बुनियाद को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीकों के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे न केवल बड़े औद्योगिक संस्थान बल्कि लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी लाभान्वित हो सकते हैं।
एमएसएमई क्षेत्र के लिए विशेष महत्व है क्योंकि ये कंपनियां अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाने के लिए उन्नत तकनीकें अपनाना चाहती हैं। भारत के आर एंड डी संसाधनों का सही उपयोग करके इन उद्यमों को आधुनिक उपकरण और प्रक्रियाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि कैसे देश की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग करके न केवल राष्ट्रीय विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत किया जा सकता है, बल्कि भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।