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बलात्कार मामलों में लंबी प्रतीक्षा, लंबित मामले बढ़ रहे हैं
भारत में बलात्कार के मामलों की संख्या 2018 के बाद से स्थिर बनी हुई है, लेकिन लंबित मामलों में भारी वृद्धि देखी जा रही है। उसी वर्ष में दोषसिद्धि की दर 2% से भी कम है, जिससे न्याय के लिए प्रतीक्षा अवधि में वृद्धि हुई है।
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भारत की न्याय व्यवस्था में बलात्कार के मामलों की सुनवाई में विलंब की समस्या गहरी हो गई है। हालांकि पिछले कई वर्षों में दर्ज किए जाने वाले बलात्कार के मामलों की संख्या में विशेष वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन अदालतों में लंबित पड़े मामलों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पीड़ितों को न्याय पाने में लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
2018 के बाद से प्रतिवर्ष दर्ज होने वाले बलात्कार के मामलों की संख्या में स्थिरता बनी है, परंतु इन मामलों के निपटारे की गति काफी धीमी रही है। न्यायालयों में जमा होने वाले मामलों की तुलना में उन्हें निपटाने की क्षमता में स्पष्ट अंतराल पाया गया है, जिससे लंबित मामलों का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है।
दोषसिद्धि की दर भी चिंताजनक स्थिति में है। जिन मामलों की सुनवाई पूरी हुई है, उनमें से 2% से भी कम में दोषसिद्धि तक पहुंचना संभव हुआ है। यह आंकड़ा न केवल न्याय प्रणाली की दक्षता पर सवाल उठाता है, बल्कि पीड़ितों के लिए न्याय प्राप्त करने की संभावनाओं को भी प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि न्याय में इस विलंब को दूर करने के लिए अदालतों में अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति, तेजी से मामलों की सुनवाई और बेहतर जांच प्रक्रिया जैसे कदम उठाने की आवश्यकता है। लंबित मामलों में कमी लाए बिना न्याय की विश्वसनीयता को बनाए रखना मुश्किल होगा।