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1991 से पहले ही सुधार के विचार उभरने लगे थे: निtin देसाई

अर्थशास्त्री निtin देसाई के अनुसार भारत के आर्थिक सुधार के विचार 1991 से बहुत पहले 1970 के दशक के अंत में ही प्रकट होने लगे थे। उनके मुताबिक आज का सबसे बड़ा चुनौती निर्माण क्षेत्र और नए व्यावसायों को मजबूत करना है ताकि रोजगार बढ़ें और कृषि क्षेत्र से श्रमिकों का स्थानांतरण हो सके।

LSN India · 10 September 2026

1991 से पहले ही सुधार के विचार उभरने लगे थे: निtin देसाई

भारत के प्रमुख आर्थिक विचारकों में से एक निtin देसाई का मानना है कि देश के आर्थिक सुधार के बीज 1991 से काफी पहले बो दिए गए थे। उन्होंने कहा कि सुधार संबंधी विचार 1970 के दशक के अंत में ही सरकार और नीति निर्माताओं के बीच उभरने लगे थे, जिनका क्रियान्वयन 1991 में औपचारिक रूप से शुरू हुआ।

देसाई के अनुसार, हालांकि पिछले तीन दशकों में भारत ने आर्थिक सुधारों के माध्यम से कई लक्ष्य हासिल किए हैं, लेकिन वर्तमान समय में देश के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि अब केवल सेवा क्षेत्र पर निर्भर रहना काफी नहीं है।

इस विचारक के मुताबिक, भारत को अपने निर्माण क्षेत्र को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए और नए व्यावसायिक अवसर पैदा करने चाहिए। यह कदम रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में देश की एक बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है।

देसाई ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत को न केवल आर्थिक विकास दर बढ़ानी होगी, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि यह विकास समावेशी हो। कृषि क्षेत्र से कुशल श्रमिकों का विनिर्माण और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानांतरण भारत के दीर्घकालीन आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।