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भारत को प्रेषण लागत संयुक्त राष्ट्र लक्ष्य से दोगुनी, अंतरराष्ट्रीय हस्तांतरण महंगा

भारत को विदेश से आने वाली धनराशि बढ़ रही है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया और सऊदी अरब जैसे देशों से भेजे जाने वाले पैसे की लागत संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित लक्ष्य से दोगुनी है। सीमा पार भुगतान व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

LSN India · 16 September 2026

भारत को प्रेषण लागत संयुक्त राष्ट्र लक्ष्य से दोगुनी, अंतरराष्ट्रीय हस्तांतरण महंगा

भारत में प्रेषण प्रवाह बढ़ने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण की लागत चिंता का विषय बनी हुई है। ऑस्ट्रेलिया और सऊदी अरब जैसे प्रमुख प्रेषण स्रोत देशों से भारत में पैसा भेजने की लागत संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित 3 प्रतिशत के लक्ष्य से लगभग दोगुनी है।

वर्तमान व्यवस्था में विभिन्न बैंक और मनी ट्रांसफर सेवाओं के माध्यम से प्रेषण भेजे जाते हैं, जिससे लेनदेन में काफी खर्च आता है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) जैसी प्रौद्योनोलोजी के सीमित अंतरराष्ट्रीय उपयोग से भी यह समस्या बढ़ गई है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रेषण आय महत्वपूर्ण है, लेकिन उच्च लागत विदेशी मजदूरों की आय को कम करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार डिजिटल भुगतान कनेक्टिविटी में विस्तार से लागत कम की जा सकती है और अधिक लोग औपचारिक चैनलों का उपयोग कर सकते हैं।

इस दिशा में सुधार के लिए भारत, ऑस्ट्रेलिया और सऊदी अरब जैसे देशों के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करने से न केवल लागत कम होगी, बल्कि लेनदेन भी तेज और सुरक्षित हो सकेगा।