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नदियों को जोड़ने वाली परियोजना से आक्रामक प्रजातियों का खतरा
भारत की नदी जोड़ो परियोजना विदेशी आक्रामक प्रजातियों को नई नदियों तक पहुंचाने का रास्ता खोल सकती है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि पानी के कृत्रिम संपर्क से पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है।
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नीचली गंगा घाटी में मौजूद 13-15 विदेशी आक्रामक प्रजातियां अब महानदी जैसी संवेदनशील नदियों के लिए खतरा बन सकती हैं। महानदी में 69 संकटग्रस्त प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनके संरक्षण के लिए जलवायु और पारिस्थितिकी की विशिष्ट परिस्थितियां आवश्यक हैं।
राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के तहत विभिन्न नदी घाटियों को कृत्रिम जल प्रणालियों से जोड़ने की योजना है। हालांकि, यह परियोजना अनजाने में आक्रामक जलीय प्रजातियों के प्रसार का माध्यम बन सकती है और साथ ही जलीय रोगजनकों के फैलाव को भी गति दे सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक नदी घाटी का अपना विशिष्ट जैविक समुदाय होता है। बाहरी प्रजातियों के प्रवेश से ये संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं और स्थानीय प्रजातियों के अस्तित्व को खतरे में डाल सकते हैं।
इस चुनौती का समाधान करने के लिए परियोजना की योजना और कार्यान्वयन में पारिस्थितिकीय सुरक्षा उपायों को शामिल करना अत्यावश्यक है। जलीय जैव विविधता की रक्षा करते हुए नदी संपर्क परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए व्यापक अध्ययन और सावधानीपूर्वक योजना की जरूरत है।