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भारत की छतों पर सौर ऊर्जा का विशाल संभावना, 15 गीगावाट तक मांग बढ़ सकती है
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सब्सिडी से छत पर लगाए जाने वाले सौर पैनलों की स्थापना तेज हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2027 के बाद नीति की निरंतरता ही उत्पादन और निवेश को बनाए रखने की कुंजी होगी।
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भारत की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की क्षमता 132 गीगावाट तक है, जबकि आने वाले समय में इसकी मांग 15 गीगावाट तक पहुंच सकती है। भारतीय सौर उत्पादक संघ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत प्रदान की जा रही सब्सिडी ने घरेलू सौर पैनल लगाने के कार्यक्रम को नई गति दी है।
वर्तमान में छतों पर लगाए जाने वाले सौर पैनलों की स्थापना दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार की इस योजना के तहत बिजली उपभोक्ताओं को सब्सिडी दी जा रही है, जिससे सामान्य परिवारों के लिए सौर ऊर्जा में निवेश आर्थिक रूप से सुलभ हो गया है।
हालांकि, विशेषज्ञों की राय में इस तेजी को बनाए रखने के लिए नीति की स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है। मार्च 2027 के बाद यदि सरकारी सहायता समाप्त हो जाती है, तो इस क्षेत्र में निवेश और उत्पादन गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
सौर ऊर्जा क्षेत्र में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए भी नीतिगत समर्थन की आवश्यकता है। भारत के जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने और अक्षय ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाने के लिए छतों पर सौर पैनलों की स्थापना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।