World · India Bureau
सियांग परियोजना और चीन के 60 गीगावाट बांध योजना में टकराव
भारत की सियांग परियोजना और चीन की विशाल जलविद्युत योजना के बीच क्षेत्रीय जल संसाधनों को लेकर तनाव बढ़ रहा है। दोनों देशों की महत्वाकांक्षी योजनाएं ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
LSN India ·

भारत की सियांग जलविद्युत परियोजना और चीन की 60 गीगावाट क्षमता वाली मेगा बांध योजना दक्षिण एशिया के जल राजनीति के केंद्र में उभरी है। सियांग परियोजना, जिसे ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन में विकसित किया जा रहा है, भारत की ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने का महत्वपूर्ण साधन है। दूसरी ओर, चीन की तिब्बत क्षेत्र में स्थित विशाल बांध परियोजना नीचे की ओर प्रवाहित जल की मात्रा को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
इस क्षेत्र में जल प्रबंधन संबंधी किसी भी बड़े कदम का असर भारत, बांग्लादेश और अन्य दक्षिण एशियाई देशों में महसूस होगा। ब्रह्मपुत्र नदी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए जीवन रेखा है और इसके प्रवाह में कोई बदलाव स्थानीय कृषि, पारिस्थितिकी तंत्र और बाढ़ नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है। चीन की परियोजना की स्केल इस चिंता को और गंभीर बनाती है।
क्षेत्रीय विशेषज्ञ इन परियोजनाओं को लेकर पारदर्शी सूचना साझा करने और अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों के महत्व पर बल दे रहे हैं। भारत और चीन के बीच सीमावर्ती नदियों पर सहयोग की कमी दीर्घकालिक पर्यावरणीय और आर्थिक जोखिम पैदा कर रही है। इस स्थिति में द्विपक्षीय संवाद और क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।