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कौशल विकास से रोजगार तक: व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी बनी बड़ी बाधा
भारत में शिक्षार्थियों को डिग्री प्राप्त करने के बाद भी रोजगार के लिए तैयार नहीं माना जा रहा है। अध्ययन में सामने आया है कि 80 प्रतिशत विद्यार्थी व्यावहारिक अनुभव और उद्योग जगत के संपर्क की कमी को अपनी शिक्षा का सबसे बड़ा खामी मानते हैं।
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भारतीय शिक्षा व्यवस्था में कौशल विकास और नौकरी के बीच की खाई को पाटने की तत्काल आवश्यकता है। वर्तमान में विश्वविद्यालयों से निकलने वाले स्नातकों को वास्तविक कार्य परिवेश से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण को मजबूत करने की मांग उठ रही है।
सर्वेक्षण आंकड़ों के अनुसार अधिकांश विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप, प्रायोगिक कार्य और औद्योगिक प्रशिक्षण से वंचित रह जाते हैं। यह कमी उन्हें नियोक्ताओं की नजर में कम आकर्षक बनाती है और प्रवेश स्तर की नौकरी पाना मुश्किल बना देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल की समान महत्ता दी जानी चाहिए।
इस चुनौती से निपटने के लिए शिक्षा संस्थानों को उद्योग जगत के साथ मजबूत सहयोग स्थापित करना आवश्यक है। कार्यशाला, प्रशिक्षण केंद्र और फील्ड प्रोजेक्ट्स को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाने से शिक्षार्थियों को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, उद्योग के प्रतिनिधियों को शिक्षा पाठ्यक्रम तैयार करने में शामिल किया जाना चाहिए ताकि बाजार की वास्तविक जरूरतें पाठ्यक्रम में प्रतिफलित हो सकें।