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दक्षिण-पश्चिम मानसून 12 प्रतिशत की कमी के साथ समाप्त
भारत में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून 2015 के बाद सबसे कम वर्षा लेकर आया है। पूर्व और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में 1901 के बाद सबसे सूखा मानसून देखा गया।
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इस वर्ष का दक्षिण-पश्चिम मानसून अपेक्षित वर्षा से 12 प्रतिशत की कमी के साथ समाप्त हुआ है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में सूखे की स्थिति को दर्शाता है। यह 2015 के बाद सबसे कम मानसूनी वर्षा है और आने वाले समय में जल संसाधनों पर दबाव डाल सकता है।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में मानसून की स्थिति विशेष रूप से गंभीर रही है। इन क्षेत्रों में 1901 के आंकड़ों के आरंभ से यह सबसे सूखा मानसून साबित हुआ है, जो इन क्षेत्रों में असामान्य सूखे की परिस्थितियों को दर्शाता है।
दक्षिणी प्रायद्वीप में भी वर्षा की स्थिति चिंताजनक रही है। यहां दर्ज की गई वर्षा 1901 के बाद चौथी सबसे कम है, जो यह संकेत देता है कि देश के कई क्षेत्रों में लगातार सूखे की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
आगामी अक्टूबर माह के लिए मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा और वर्षा सामान्य से कम होगी। इस स्थिति से कृषि और जल आपूर्ति दोनों ही क्षेत्रों में चुनौतियों के बढ़ने की संभावना है।