World · India Bureau
भारत के यूपीआई को सुधार की जरूरत, अमेरिकी दबाव नहीं: विश्लेषकों का मत
भारत के एकीकृत भुगतान ढांचे में सुधार के लिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि व्यक्तिगत लेनदेन मुफ्त रखे जाएं, जबकि बड़े व्यावसायिक प्लेटफॉर्म्स को शुल्क देना चाहिए।
LSN India ·

भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली को लेकर विचारकों का मानना है कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) में किए जाने वाले सुधार आंतरिक जरूरतों पर आधारित होने चाहिए, न कि बाहरी दबाव के कारण। नीति निर्माताओं के समक्ष महत्वपूर्ण सवाल यह है कि किस तरह की व्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सर्वोत्तम रहेगी।
विश्लेषकों के अनुसार, यूपीआई के तहत व्यक्तिगत और छोटे व्यापारियों के लेनदेन को निःशुल्क रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह साधारण नागरिकों और छोटे व्यावसायियों को आर्थिक समावेशन में सहायता करता है। इसके विपरीत, बड़े व्यावसायिक प्लेटफॉर्म्स और कॉर्पोरेट खिलाड़ियों से शुल्क एकत्रित करने की व्यवस्था की जा सकती है।
प्रस्तावित मॉडल के तहत बड़े वाणिज्यिक प्लेटफॉर्म्स के लिए लगभग 0.5 प्रतिशत का शुल्क निर्धारित किया जा सकता है। यह दृष्टिकोण राजस्व संग्रहण और डिजिटल अवसंरचना के विकास में मदद कर सकता है, साथ ही सामान्य जनता के लिए सेवाएं सुलभ रखेगा।
नीति निर्माताओं के लिए संदेश यह है कि भारत को अपनी डिजिटल भुगतान प्रणाली के विकास में स्वायत्त निर्णय लेने चाहिए। यूपीआई की सफलता का कारण इसका समावेशी स्वरूप है, जिसे किसी भी बाहरी दबाव में बदला नहीं जाना चाहिए।