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भारतीय संस्कृति की विरासत संरक्षित करने का आह्वान किया उपराष्ट्रपति ने
उपराष्ट्रपति ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने के लिए समन्वित प्रयासों की मांग की है। उन्होंने केरल की सांप्रदायिक सद्भावना की परंपरा को सभ्यता के लिए एक आदर्श माना है।
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देश के उपराष्ट्रपति ने भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के महत्व पर जोर देते हुए कहा है कि इसके लिए समाज के सभी वर्गों का सामूहिक प्रयास जरूरी है।
उपराष्ट्रपति ने केरल की बहुधार्मिक परंपरा की सराहना करते हुए बताया कि यहां के लोग धार्मिक विभाजन से परे होकर पर्व मनाते हैं। उन्होंने कहा कि रमजान, क्रिसमस और ओणम जैसे त्योहार यहां सभी धर्मों के लोग मिलकर मनाते हैं, भले ही उनकी अपनी आस्था अलग हो।
यह आध्यात्मिक समरसता की परंपरा देश की सांस्कृतिक पहचान का मूल आधार है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज का दायित्व है। उपराष्ट्रपति का मानना है कि ऐसी सामूहिक चेतना के माध्यम से ही भारत की बहुरंगी संस्कृति को सुरक्षित रखा जा सकता है।
भारतीय मूल्यों और परंपराओं के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण केवल अतीत को याद रखना नहीं है, बल्कि भविष्य की मजबूत नींव तैयार करना है।