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अक्टूबर में थोक मुद्रास्फीति 12% को पार कर सकती है: इंडिया रेटिंग्स
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च का अनुमान है कि अक्टूबर में भारत की थोक मुद्रास्फीति 12 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, जबकि खुदरा मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत का स्तर छू सकती है। प्रतिकूल आधार प्रभाव, मौसमी परिस्थितियां और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि इस वृद्धि के मुख्य कारण बताए जा रहे हैं।
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भारत की मुद्रास्फीति अक्टूबर माह में उल्लेखनीय स्तर तक पहुंचने की संभावना है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के विश्लेषण के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 12 प्रतिशत की सीमा को पार करने वाली है, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति छः प्रतिशत के आंकड़े को छू सकती है।
इस मुद्रास्फीति वृद्धि के पीछे कई प्रमुख कारक काम कर रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, पिछले वर्ष के निम्न आधार प्रभाव के कारण वर्ष-दर-वर्ष तुलना में अधिक वृद्धि दिख रही है। साथ ही, असामान्य मौसमी परिस्थितियों के कारण कृषि उत्पादों की कीमतों में दबाव बना हुआ है।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में मजबूती भी भारतीय बाजार को प्रभावित कर रही है। कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की महंगाई परोक्ष रूप से विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि का कारण बन रही है।
मुद्रास्फीति के इस प्रक्षेपण के साथ, मौद्रिक नीति निर्माताओं के लिए आने वाले महीनों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह स्थिति मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए किए जाने वाले प्रयासों को प्रभावित कर सकती है।