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2035 तक भारत की पवन ऊर्जा क्षमता 250 गीगावाट पार कर सकती है
सुजलॉन के प्रबंध निदेशक गिरीश टंटी का अनुमान है कि बढ़ती मांग के कारण पवन ऊर्जा का लक्ष्य बढ़ाया जा सकता है। सेक्टर 2030 तक 100 गीगावाट क्षमता हासिल करने की राह पर है।
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सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक गिरीश टंटी का मानना है कि भारत की पवन ऊर्जा क्षमता 2035 तक 250 गीगावाट (जीडब्ल्यू) का स्तर पार कर सकती है। उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा की बढ़ती मांग और औद्योगिक विकास के कारण सरकार पवन ऊर्जा के अपने लक्ष्यों को बढ़ाने के लिए प्रेरित हो सकती है।
टंटी के अनुसार, पवन ऊर्जा सेक्टर 2030 तक 100 गीगावाट की क्षमता हासिल करने की दिशा में सही गति से आगे बढ़ रहा है। यह लक्ष्य भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने की दीर्घकालीन रणनीति का एक अहम हिस्सा है।
इंडस्ट्री के शीर्ष अधिकारी का यह आकलन ग्रिड बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ आता है। टंटी ने संकेत दिया कि विद्युत वितरण नेटवर्क में बेहतरी से पवन ऊर्जा के एकीकरण में आने वाली बाधाएं दूर होने की संभावना है।
भारत ने 2030 तक अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 500 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें पवन ऊर्जा का महत्वपूर्ण योगदान होगा। विश्लेषकों का मानना है कि सही नीतिगत समर्थन और बुनियादी ढांचे में निवेश के साथ भारत इस उद्देश्य को हासिल करने में सक्षम है।