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यूरोपीय संघ में भारत को स्टील निर्यात का बड़ा कोटा मिला, लेकिन कार्बन शुल्क बना रहा
भारत को यूरोपीय संघ के बाजार में स्टील निर्यात के लिए अतिरिक्त 694,853 टन का प्राथमिकता कोटा मिला है। यह सुविधा मौजूदा विश्व व्यापार संगठन कोटा के साथ आएगी, लेकिन कार्बन सीमा शुल्क का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है।
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भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए समझौते से भारतीय स्टील उत्पादकों को यूरोप के बाजार में महत्वपूर्ण प्रवेश सुविधा मिली है। इस समझौते के तहत भारत को 694,853 टन स्टील के अतिरिक्त निर्यात कोटा का लाभ मिलेगा, जो विश्व व्यापार संगठन के तहत मौजूदा 946,616 टन कोटा के अलावा है।
यह व्यवस्था भारतीय स्टील उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण विकास है, क्योंकि यूरोपीय बाजार वैश्विक स्टील व्यापार में प्रमुख खरीदारों में से एक है। अतिरिक्त कोटा भारतीय निर्माताओं को अपनी बिक्री बढ़ाने और यूरोपीय ग्राहकों की मांग को पूरा करने में मदद करेगा।
हालांकि, समझौते में एक महत्वपूर्ण चुनौती अभी भी बनी हुई है। यूरोपीय संघ द्वारा लागू किया जा रहा कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) अभी भी भारतीय स्टील आयात पर लागू होगा। यह कार्बन शुल्क भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करने की संभावना है।
विश्लेषकों का कहना है कि जबकि अतिरिक्त कोटा एक सकारात्मक कदम है, कार्बन शुल्क की समस्या का समाधान अभी भी आवश्यक है। इस मुद्दे पर भारत और यूरोपीय संघ के बीच आगामी बातचीत महत्वपूर्ण होगी, ताकि दोनों पक्षों के लिए एक संतुलित समाधान खोजा जा सके।