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भारत अगले दो साल में 50 गीगावाट घंटे बैटरी भंडारण क्षमता जोड़ेगा
नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और सरकारी नीलामी में भंडारण से जुड़ी परियोजनाओं की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ बैटरी भंडारण का तेजी से विकास होगा। वित्त वर्ष 2026 में 1 गीगावाट घंटे से शुरुआत करते हुए यह क्षमता में भारी बढ़ोतरी देखी जाएगी।
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भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बैटरी भंडारण का विस्तार तेजी से होने वाला है। आने वाले दो वर्षों में देश 50 गीगावाट घंटे तक बैटरी भंडारण क्षमता जोड़ने के लिए तैयार है, जो नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास और ऊर्जा भंडारण समाधानों की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
वर्तमान में भारत की बैटरी भंडारण क्षमता सीमित है, लेकिन सरकार की नीलामी प्रक्रियाओं में भंडारण-संबंधित परियोजनाओं की भागीदारी में वृद्धि से यह स्थिति बदल रही है। ये परियोजनाएं सौर और पवन ऊर्जा जैसी पुनर्नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ एकीकृत होकर ग्रिड स्थिरता में सुधार लाएंगी।
भंडारण क्षमता का यह विस्तार भारत के ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा बढ़ता है, बैटरी भंडारण प्रणालियों की आवश्यकता बढ़ती जाती है ताकि बिजली आपूर्ति में स्थिरता बनी रहे और ऊर्जा का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जा सके।
इंडस्ट्री विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले समय में बैटरी भंडारण प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ेगा। यह विकास भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नई व्यावसायिक संभावनाएं और रोजगार के अवसर सृजित करेगा।