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वैश्विक क्षमता घटने के बीच भारत बनेगा विश्व का प्रमुख तेल शोधक
भारत की तेल शोधन क्षमता वर्तमान में 290 मिलियन टन प्रति वर्ष है और आने वाले समय में इसमें और भी वृद्धि होने की उम्मीद है। केंद्रीय सरकार के अनुसार वैश्विक स्तर पर शोधन क्षमता घटते हुए भारत इस क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरने के लिए तैयार है।
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भारत की तेल शोधन क्षमता में निरंतर वृद्धि से देश विश्व बाजार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। वर्तमान में भारत की कुल शोधन क्षमता 290 मिलियन टन प्रति वर्ष के आसपास है, जो देश को इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में एक प्रमुख सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित करता है।
भारत के तेल शोधन बुनियादी ढांचे का विस्तार इस समय विशेष महत्व रखता है जब वैश्विक स्तर पर शोधन क्षमता में कमी देखी जा रही है। यह परिस्थिति भारत को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करती है। सरकार के अनुसार आने वाले वर्षों में भारत की शोधन क्षमता में और भी विस्तार की योजना है।
यह विस्तार न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि विश्व के विभिन्न देशों की ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद करेगा। भारत की बढ़ती शोधन क्षमता से देश की निर्यात संभावनाओं में भी वृद्धि होगी।