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आतंकवाद की रणनीति बदली, भारत ने अपनाया सक्रिय प्रतिरोध का रास्ता
भारत ने आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब देश रक्षात्मक रुख से हटकर सक्रिय प्रतिरोध पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
LSN India ·

आतंकवाद के विरुद्ध भारत की कार्यनीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा जा रहा है। पहले जहां देश मुख्यतः आतंकी हमलों से बचाव पर केंद्रित था, वहीं अब सुरक्षा एजेंसियां आतंकवादी तत्वों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
देश की खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी क्षमता को बेहतर बनाया है। सीमावर्ती इलाकों में निगरानी को मजबूत किया गया है और आतंकवादी नेटवर्क को तोड़ने के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। यह रणनीतिगत बदलाव पिछले वर्षों में देश के सामने आए आतंकी खतरों की जटिलताओं से सीखा गया है।
प्रतिरोधात्मक नीति के तहत सुरक्षा एजेंसियां संभावित आतंकवादी संगठनों की कार्यप्रणाली और उनके नेटवर्क को समझने में अधिक समय लगा रही हैं। तकनीकी उन्नति और आसूचना साझेदारी के माध्यम से आतंकी षड्यंत्रों को आगे बढ़ने से पहले ही नाकाम किया जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग इस नई रणनीति के प्रमुख आधार हैं। आने वाले समय में इस सक्रिय दृष्टिकोण से आतंकवाद को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।