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मुद्रास्फीति लक्ष्य को विकसित देशों के 2% औसत से जोड़ा जाए: पात्रा
भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों का मानना है कि मूल्य स्थिरता को नियंत्रित करने वाली मौद्रिक नीति आर्थिक विकास में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। भारत के मुद्रास्फीति लक्ष्य को विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ संरेखित किया जाना चाहिए।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से दिया गया एक बयान सुझाता है कि देश का मुद्रास्फीति नियंत्रण ढांचा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होना चाहिए। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में 2 प्रतिशत का औसत मुद्रास्फीति लक्ष्य माना जाता है, जिसे भारत भी अपना सकता है।
मौद्रिक नीति को मजबूत करने के संदर्भ में आरबीआई के विश्लेषकों का तर्क है कि कीमतों में स्थिरता बनाए रखना केवल महंगाई को नियंत्रित नहीं करता, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहित करता है। विरोधी मुद्रास्फीति दृष्टिकोण अपनाने से व्यवसायों और उपभोक्ताओं में विश्वास बढ़ता है।
भारत की केंद्रीय बैंकिंग संस्था का यह विचार वैश्विक आर्थिक प्रवृत्तियों के अनुरूप है। विश्व के अधिकांश विकसित देश अपनी मूल्य स्थिरता को 2 प्रतिशत के आसपास बनाए रखते हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने से बचत, निवेश और उत्पादन गतिविधियों में अनुमानित वृद्धि हो सकती है।
आरबीआई के इस प्रस्ताव का अभिप्राय यह है कि कुशल मौद्रिक प्रबंधन से न केवल महंगाई पर नियंत्रण संभव है, बल्कि राष्ट्रीय आय और रोजगार सृजन में भी सुधार देखा जा सकता है। दीर्घकालीन आर्थिक स्थिरता के लिए कीमत नियंत्रण को एक आवश्यक घटक माना जाता है।