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यूपीआई डेटा से एमएसएमई को औपचारिक साख में लाने का मौका: नीति आयोग
नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी अशोक लाहिरी का मानना है कि यूपीआई लेनदेन डेटा का उपयोग करके लघु और मध्यम उद्यमों को बैंकिंग प्रणाली में शामिल किया जा सकता है। इससे ऋण मूल्यांकन और जोखिम आकलन में सुधार आ सकता है।
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नीति आयोग के प्रमुख अर्थशास्त्री अशोक लाहिरी ने भारत को यूपीआई प्लेटफॉर्म से उत्पन्न लेनदेन संबंधी आंकड़ों का बेहतर उपयोग करने की सलाह दी है। लाहिरी के अनुसार, डिजिटल भुगतान के माध्यम से जुटाया गया यह डेटा छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों की साख योग्यता का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
लेनदेन डेटा का विश्लेषण करके बैंकिंग संस्थाएं एमएसएमई के व्यावसायिक कार्यप्रवाह, नकदी प्रवाह और वित्तीय स्थिरता को बेहतर तरीके से समझ सकती हैं। यह जानकारी ऋण आवेदनों के मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक सटीक और विश्वसनीय बना सकती है। साथ ही, उधारदाताओं के लिए जोखिम की गणना करना भी सरल हो सकता है।
भारत में लाखों छोटे और मध्यम उद्यम अभी भी औपचारिक साख प्रणाली से बाहर हैं। यूपीआई डेटा का सदुपयोग इन उद्यमों को बैंकिंग सेवाओं में शामिल करने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। डिजिटल भुगतान के विस्तार से जुटाया गया यह आंकड़ा वित्तीय समावेश के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक साबित हो सकता है।
नीति आयोग का यह सुझाव देश की आर्थिक नीति निर्माताओं और वित्तीय संस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा संकेत है। डेटा-संचालित दृष्टिकोण अपनाकर भारत वित्तीय क्षेत्र में और अधिक समावेशी और कुशल बदलाव ला सकता है।