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बाल विवाह: प्रगति के बावजूद भारत में लाखों लड़कियां जोखिम में
भारत में बाल विवाह की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि लाखों लड़कियां अभी भी इस प्रथा का शिकार होने का खतरा झेल रही हैं।
LSN India ·

भारत में बाल विवाह के मुद्दे पर हाल के वर्षों में सकारात्मक प्रवृत्तियां देखी गई हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अभी बहुत सारा काम बाकी है। सरकारी नीतियों और जागरूकता कार्यक्रमों के चलते इस प्रथा में कमी आई है, हालांकि देश के कई हिस्सों में यह समस्या गंभीर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गरीबी, शिक्षा की कमी और सामाजिक दबाव बाल विवाह के प्रमुख कारण बने हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रथा की घटनाएं शहरी इलाकों की तुलना में अधिक देखी जाती हैं। महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के जरिए इस समस्या का समाधान संभव है, यह विशेषज्ञों का मानना है।
कानूनी प्रावधानों के बावजूद, भारत में अभी भी लाखों लड़कियों को बाल विवाह का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर संस्थाएं इस दिशा में कार्य कर रही हैं। गैर-सरकारी संगठनों का प्रयास और सामुदायिक भागीदारी इस कुप्रथा को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि लड़कियों की शिक्षा में निवेश और परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने से बाल विवाह की घटनाओं को रोका जा सकता है। समाज के सभी स्तरों पर जागरूकता बढ़ाना और कानून का कड़ाई से पालन करना आवश्यक है।