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सरकार ने तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आयात शुल्क में कटौती की
सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में भारी कटौती की है ताकि घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बना सके। कच्चे सोयाबीन और ताड़ के तेल पर शुल्क 5 प्रतिशत तक घटा दिया गया है।
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सरकार ने पाम, सोया और सूरजमुखी तेल के आयात पर शुल्क में महत्वपूर्ण कमी कर दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश में खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि को रोकना है।
नई नीति के तहत कच्चे ताड़ के तेल और कच्चे सोयाबीन के तेल पर आयात शुल्क को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। कच्चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया है यानी इसे शून्य प्रतिशत पर रखा गया है।
इसके अलावा, परिष्कृत खाद्य तेलों पर कम दरों वाली नई व्यवस्था 24 सितंबर से लागू होगी। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आयातित तेलों की कीमत को कम करेगा, जिससे खुदरा बाजार में मूल्य नियंत्रण में मदद मिलेगी।
भारत में खाद्य तेलों की मांग वर्षभर रहती है और देश का एक बड़ा हिस्सा इसकी पूर्ति के लिए आयात पर निर्भर है। सरकार की यह पहल आम जनता को बढ़ती कीमतों से राहत देने का प्रयास है।