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भारत ने रूस-यूरोपीय संघ CBAM विवाद में WTO में तीसरे पक्ष के अधिकार सुरक्षित किए
भारत ने विश्व व्यापार संगठन में रूस द्वारा यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म के खिलाफ दायर विवाद में तीसरे पक्ष के रूप में अपने अधिकारों को सुरक्षित किया है। यह कदम नई दिल्ली को इस महत्वपूर्ण व्यापार विवाद की कार्यवाही को बारीकी से पालन करने की अनुमति देता है।
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भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के समक्ष रूस द्वारा यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के विरुद्ध दायर विवाद में तीसरे पक्ष के अधिकार सुरक्षित कर लिए हैं। यह निर्णय भारत को इस व्यापार विवाद से संबंधित सभी कार्यवाहियों और निर्णयों का अवलोकन करने का अधिकार देता है।
कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म यूरोपीय संघ की एक नीति है जो कार्बन-गहन उत्पादों के आयात पर कर लगाती है। यह तंत्र जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए डिजाइन किया गया है, किंतु कई देश इसे व्यापार संबंधी गैर-टैरिफ बाधा मानते हैं जो उनके निर्यात को प्रभावित कर सकती है।
भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह विवाद महत्वपूर्ण है क्योंकि CBAM के नियमों का इस्पात, सीमेंट और अन्य उद्योगों के निर्यात पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। तीसरे पक्ष के अधिकारों को सुरक्षित करके, भारत सुनिश्चित करता है कि इस विवाद का समाधान भारतीय व्यापार हितों को ध्यान में रखते हुए हो।
भारत के इस कदम को क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापार मंचों में अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। WTO में तीसरे पक्ष के अधिकार का उपयोग करके, भारत पूरी कार्यवाही में सक्रिय भागीदार बन सकता है और आवश्यकता पड़ने पर अपने विचार प्रस्तुत कर सकता है।