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भारत के नहरों पर सौर ऊर्जा: भूमि के बिना बिजली का समाधान
भारत की विस्तृत नहर प्रणाली पर सौर पैनल लगाने से बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की समस्या का समाधान मिल रहा है। पंजाब में इस तकनीक से अब तक 100 एकड़ से अधिक जमीन बचाई जा चुकी है।
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भारत की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए नहरों का उपयोग एक नया और महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो रहा है। नहरों के ऊपर लगाए जाने वाले सोलर पैनल फ्लोटिंग सोलर सिस्टम की तरह ही काम करते हैं और इनका सबसे बड़ा लाभ यह है कि ये लगभग कोई अतिरिक्त भूमि की मांग नहीं करते हैं।
वर्तमान समय में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए जमीन प्राप्त करना तेजी से महंगा और जटिल हो गया है। ऐसे में नहरों जैसी मौजूदा अवसंरचना का उपयोग करना आर्थिक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से फायदेमंद साबित हो रहा है। इस प्रौद्योगिकी से सरकार को नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य प्राप्त करने में भी मदद मिल सकती है।
पंजाब में 20 मेगावाट क्षमता के नहर-शीर्ष सोलर सिस्टम के संस्थापन से लगभग 100 एकड़ कृषि भूमि संरक्षित होने का अनुमान लगाया गया है। यह उदाहरण दर्शाता है कि कैसे स्थानीय संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करके ऊर्जा उत्पादन और कृषि दोनों हित साध्य हो सकते हैं। इस मॉडल को देश के अन्य हिस्सों में भी अपनाने की गुंजाइश है।