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भारत की नवीकरणीय ऊर्जा महत्वाकांक्षा: 500 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि भारत आने वाले दशक में अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 500 गीगावाट की वृद्धि करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस महत्वाकांक्षी योजना से 2030 तक बीस लाख करोड़ रुपये के निवेश के अवसर सामने आएंगे।
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भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्रांति में तेजी आने वाली है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि देश अगले दस से ग्यारह वर्षों में 500 गीगावाट की अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बड़े पैमाने पर निवेश और आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण का संकेत देता है।
भारत की ऊर्जा नीति के प्रति अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सरकार के अनुसार, देश ने पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्यों को निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया है। यह उपलब्धि भारत की जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है।
इस ऊर्जा विस्तार योजना से देश के आर्थिक विकास में भी गति आएगी। 2030 तक बीस लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश अवसर उत्पन्न होंगे, जिससे नई परियोजनाओं का विकास, रोजगार सृजन और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। यह निवेश नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उद्यमियों और औद्योगिक संस्थानों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन प्रदान करेगा।