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भारत 2030 तक हेपेटाइटिस को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध
भारत ने हेपेटाइटिस बी और सी को सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरे के रूप में 2030 तक खत्म करने का दृढ़ संकल्प दोहराया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश रोकथाम, जांच, निदान, उपचार और देखभाल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
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भारत हेपेटाइटिस बी और सी को सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से एक गंभीर खतरे के रूप में मानता है और इन संक्रामक रोगों को 2030 तक समाप्त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश एक बहु-आयामी कार्यक्रम पर काम कर रहा है जिसमें रोग की रोकथाम, व्यापक जनता को जांच सुविधाएं, शीघ्र निदान और प्रभावी उपचार शामिल है।
इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य आबादी के बड़े हिस्से तक पहुंचना और उन्हें हेपेटाइटिस संक्रमण की जानकारी देना है। सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और आम जनता में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है ताकि रोग की शीघ्र पहचान संभव हो सके।
हेपेटाइटिस बी और सी वायरस से होने वाले संक्रमण भारत में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या बने हुए हैं। इन बीमारियों के कारण लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचता है और यदि समय पर उपचार न मिले तो ये घातक साबित हो सकती हैं।
भारत का यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक हेपेटाइटिस उन्मूलन लक्ष्यों के साथ संरेखित है। देश का मानना है कि सामान्य जनता के लिए सुलभ जांच और सस्ते उपचार के माध्यम से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और अंततः इसे समाप्त किया जा सकता है।