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सरकार ने दवा विक्रेताओं पर प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के विज्ञापन पर कड़े नियम प्रस्तावित किए
केंद्रीय सरकार ने दवा फार्मेसियों और होलसेलरों द्वारा केवल प्रिस्क्रिप्शन से मिलने वाली दवाओं के विज्ञापन पर कठोर प्रतिबंध लगाने के लिए एक मसौदा संशोधन प्रस्तावित किया है। यह कदम अनुचित आत्म-चिकित्सा को रोकने और अनधिकृत प्रचार को हतोत्साहित करने के लिए उठाया गया है।
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सरकार की ओर से पेश किया गया मसौदा संशोधन प्रिस्क्रिप्शन-केवल दवाओं के विज्ञापन पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की मांग करता है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दवा विक्रेताओं और थोक व्यापारियों द्वारा अनधिकृत प्रचार-प्रसार को रोकना है, जो आम जनता में आत्म-चिकित्सा की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं।
इस नीति के तहत फार्मेसियों और दवा होलसेलरों को चिकित्सकीय पर्यवेक्षण के बिना बेची जाने वाली दवाओं का विज्ञापन नहीं करने दिया जाएगा। प्रस्तावित नियम का मानना है कि ऐसा विज्ञापन न केवल दवा कानूनों का उल्लंघन करता है बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
सरकार ने सभी हितधारकों से इस मसौदा संशोधन पर अपने विचार और सुझाव देने के लिए 30 दिनों का समय दिया है। दवा निर्माता, फार्मेसी संघ और अन्य प्रासंगिक पक्ष इस अवधि में अपनी प्रतिक्रिया प्रदान कर सकते हैं।
इस संशोधन को लागू करने से आत्म-चिकित्सा से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने और दवा उपयोग को विनियमित करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दवा प्रतिरोध जैसी गंभीर समस्याओं को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।