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सरकार ने स्टेम सेल थेरेपी के नियम कड़े किए, आटिज्म में नियमित उपयोग पर प्रतिबंध
स्वास्थ्य मंत्रालय ने आटिज्म के इलाज के लिए स्टेम सेल थेरेपी को केवल अनुमोदित नैदानिक परीक्षणों तक सीमित कर दिया है। यह निर्णय किसी भी प्रकार की स्टेम सेल थेरेपी को नियंत्रित तरीके से संचालित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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सरकार ने स्टेम सेल थेरेपी के उपयोग को लेकर नियमों को और कड़ा कर दिया है। विशेषकर आटिज्म के इलाज में इस तकनीक के उपयोग पर अब कठोर प्रतिबंध लागू होंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय की नई नीति के अनुसार, आटिज्म के रोगियों के लिए किसी भी प्रकार की स्टेम सेल थेरेपी का चिकित्सीय उपयोग केवल दूरदर्शी रूप से अनुमोदित नैदानिक परीक्षणों तक ही सीमित रहेगा।
यह निर्णय अप्रमाणित और संभावित खतरनाक चिकित्सा पद्धतियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संरक्षा उपाय है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कड़े नियम रोगियों को अनावश्यक जोखिमों से बचाएंगे और अनुसंधान को वैज्ञानिक मानकों के तहत आगे बढ़ने में मदद करेंगे।
मंत्रालय के इस कदम से देश में स्टेम सेल थेरेपी के क्षेत्र में एक सख्त नियामक ढांचा स्थापित होगा। आटिज्म सहित अन्य विकारों के इलाज के लिए इस तकनीक के संभावित लाभों की खोज जारी रहेगी, लेकिन अब यह केवल कड़ाई से निरीक्षित नैदानिक परीक्षणों के माध्यम से ही संभव होगी।
स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का विनियमन रोगियों के हितों की रक्षा करते हुए वैध वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है। यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों के साथ भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।