Politics · India Bureau
भारत का पहला 100% हाइड्रोजन आधारित डीआरआई संयंत्र विकसित होगा
सीएसआईआर-आईएमएमटी की अगुवाई में एक राष्ट्रीय परियोजना भारत में पहली बार पूरी तरह हाइड्रोजन से संचालित प्रत्यक्ष अपचयित लोहा संयंत्र विकसित करेगी। इस 207 करोड़ रुपये की परियोजना का लक्ष्य इस्पात क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना है।
LSN India ·

सीएसआईआर-खनिज और सामग्री प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईएमएमटी) की अगुवाई में एक संघ भारत का पहला प्रत्यक्ष अपचयित लोहा (डीआरआई) संयंत्र विकसित करेगा जो पूरी तरह हाइड्रोजन पर चलेगा। यह 20 टन प्रति दिन की क्षमता वाली पायलट परियोजना स्टील मंत्रालय और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी प्राप्त कर चुकी है।
इस परियोजना को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत सरकार की ओर से 113 करोड़ रुपये की सहायता मिलेगी। शेष 94 करोड़ रुपये की निधि संघ के सदस्य संगठनों द्वारा जुटाई जाएगी। कुल परियोजना लागत 207 करोड़ रुपये है।
सीएसआईआर-आईएमएमटी के निदेशक रामानुज नारायण के अनुसार, यह सुविधा अगस्त 2029 तक चालू हो जाएगी। इसका उद्देश्य भारतीय परिस्थितियों के लिए उपयुक्त हाइड्रोजन आधारित डीआरआई प्रौद्योगिकी विकसित और प्रदर्शित करना है, विशेषकर देशीय लौह अयस्क के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए।
इस संघ में गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड, लॉयड स्टील, जिंदल स्टेनलेस और थिएसेनक्रुप इंडस्ट्रीज इंडिया शामिल हैं। यह पहल भारत के इस्पात क्षेत्र को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।