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नमस्ते योजना का विस्तार: ग्रामीण भारत में सफाई कर्मचारियों को शामिल करने की योजना
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने नमस्ते आत्मनिर्भर भारत योजना में आत्मनिर्भरता की दर को लेकर चिंता जताई है। लगभग एक लाख सीवर और सेप्टिक टैंक कामगारों में से केवल 810 को ही पूंजीगत सहायता के लिए मंजूरी मिली है।
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने नमस्ते आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत अत्यधिक अस्वीकृति दर को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। यह योजना सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई कर्मचारियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई थी।
एनसीएससी की रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत लगभग एक लाख सीवर और सेप्टिक टैंक कामगारों की पहचान की गई थी। हालांकि, इनमें से केवल 810 आवेदकों को ही पूंजीगत सहायता के लिए मंजूरी दी गई। इससे भी चिंताजनक स्थिति यह है कि इन अनुमोदित आवेदनों में से केवल 147 को ही वास्तविक धनराशि प्राप्त हुई है।
आयोग का मानना है कि ग्रामीण भारत के सीमांत वर्गों को लाभान्वित करने के लिए योजना का विस्तार करने की तुरंत आवश्यकता है। आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने और अस्वीकृति की दर को कम करने के लिए सुधार किए जाने की जरूरत है।
यह योजना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हाशिए पर रहने वाले समुदायों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुधारों के माध्यम से इस योजना की पहुंच को काफी बढ़ाया जा सकता है और अधिक लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाया जा सकता है।