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UPI लेनदेन पर 0.40% MDR शुल्क, 2000 रुपये से अधिक राशि पर लागू
भारतीय नियामकों ने UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट की नई संरचना घोषित की है, जो अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों को इस शुल्क से मुक्त रखा गया है।
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डिजिटल भुगतान प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए, नियामक प्राधिकारियों ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट की नई नीति घोषित की है। नई दिशानिर्देशों के अनुसार, 2000 रुपये से अधिक मूल्य के UPI लेनदेन पर 0.40 प्रतिशत MDR शुल्क लागू किया जाएगा। यह नया दर ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा।
हालांकि, नीति में व्यापक छूट प्रावधान शामिल हैं। साधारण नागरिकों द्वारा किए जाने वाले लेनदेन पूरी तरह से शुल्क-मुक्त रहेंगे। यह सुनिश्चित करता है कि खुदरा ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।
छोटे व्यापारियों को भी इस शुल्क संरचना से विशेष सुविधा दी गई है। नीति का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देते हुए व्यापारियों के लिए एक संतुलित माहौल बनाना है। नई व्यवस्था में बड़े मर्चेंट्स को ही मुख्य रूप से शुल्क का बोझ वहन करना पड़ेगा।
इस निर्णय से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक नया संतुलन स्थापित होने की अपेक्षा है। नियामकों का मानना है कि यह संरचना देश की जनसंख्या के बड़े हिस्से तक डिजिटल भुगतान की पहुंच को सुरक्षित रखेगी।