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लिकटेंस्टीन के साथ दोहरे कराधान से बचाव समझौते पर भारत की जांच
भारत लिकटेंस्टीन द्वारा प्रस्तावित दोहरे कराधान से बचाव समझौते (डीटीएए) की जांच करने जा रहा है। यह द्विपक्षीय संधि एक ही आय पर दोनों देशों में कराधान को रोकने के लिए डिज़ाइन की गई है।
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भारत सरकार यूरोपीय देश लिकटेंस्टीन की ओर से लाया गया दोहरे कराधान से बचाव समझौते का प्रस्ताव परखने के लिए तैयार हो गई है। डीटीएए एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संधि है जो दो देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करती है।
दोहरे कराधान से बचाव समझौता मुख्य रूप से यह सुनिश्चित करता है कि किसी व्यक्ति या कंपनी की आय पर एक ही बार कर लगे। इस समझौते के तहत, यदि कोई भारतीय नागरिक या कंपनी लिकटेंस्टीन में आय अर्जित करती है, तो उस पर दोनों देशों में एक साथ कर नहीं लगेगा।
भारत के पास विश्व के लगभग 100 से अधिक देशों के साथ ऐसे समझौते हैं। ये संधियां निवेश को प्रोत्साहित करती हैं और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देती हैं। लिकटेंस्टीन के साथ यह समझौता संभवतः व्यापार और निवेश के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों को गहरा करेगा।
भारतीय कर अधिकारियों द्वारा इस प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी और अगले चरण में इसे संसद के समक्ष रखा जा सकता है। इस तरह के समझौते कर चोरी को रोकने और कानूनी व्यापार तथा निवेश संबंधों को सुविधाजनक बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।