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कृषि सौर ऊर्जा योजना शीघ्र शुरू करेगी सरकार, 5 गीगावाट क्षमता संभव
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से कृषि-आधारित फोटोवोल्टिक परियोजनाओं के लिए केंद्रीय समर्थन योजना की घोषणा की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य एग्रीपीवी परियोजनाओं की 25-30 प्रतिशत अधिक लागत को पूरा करना है।
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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने कृषि-सौर ऊर्जा समर्थन योजना शीघ्र शुरू करने की घोषणा की है, जिससे देश में इस क्षेत्र में 5 गीगावाट तक की क्षमता जोड़ी जा सकेगी। मंत्रालय के सचिव के अनुसार, प्रस्तावित केंद्रीय योजना एग्रीपीवी परियोजनाओं की लागत में आने वाली बाधा को दूर करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
एग्रीपीवी परियोजनाएं पारंपरिक सौर ऊर्जा संयंत्रों की तुलना में 25 से 30 प्रतिशत अधिक महंगी होती हैं, क्योंकि इनमें कृषि भूमि पर सौर पैनल स्थापित करते समय कृषि उत्पादन को भी जारी रखना पड़ता है। प्रस्तावित योजना इसी अंतर को कम करने का प्रयास करेगी और किसानों को दोहरी आय का अवसर प्रदान करेगी।
योजना के तहत क्षमता वृद्धि काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य सरकारें नवीकरणीय ऊर्जा के लिए फीड-इन टैरिफ (बिजली खरीद दरें) की अधिसूचना कितनी जल्दी जारी करती हैं। फीड-इन टैरिफ एग्रीपीवी परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता का आधार है।
इस योजना से भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत भी बनेंगे। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे।