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2036 तक भारत में प्राथमिक शिक्षा आयु वर्ग में 20% की गिरावट का अनुमान
भारत में 5-9 साल के बच्चों की संख्या 2011 के 125.3 करोड़ से घटकर 2036 तक 100.2 करोड़ रह जाने का अनुमान है। जन्मदर में कमी और प्राथमिक शिक्षा की मांग में बदलाव इसका प्रमुख कारण है।
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भारत के प्राथमिक विद्यालय आयु वर्ग की जनसंख्या में आने वाले डेढ़ दशक में तीव्र गिरावट का संकेत मिल रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, देश में 5-9 साल के बच्चों की संख्या में 20 प्रतिशत की कमी देखी जाएगी। यह गिरावट जनसांख्यिकीय परिवर्तन और शिक्षा पद्धति में बदलती प्रवृत्तियों का परिणाम है।
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में इस आयु वर्ग की कुल जनसंख्या 125.3 करोड़ थी। शोध संस्थानों के अनुमान के मुताबिक, यह संख्या 2036 तक घटकर महज 100.2 करोड़ रह जाएगी। यह प्रवृत्ति देश के विभिन्न हिस्सों में भिन्न गति से दिखाई देगी।
जन्मदर में निरंतर कमी इस गिरावट का मुख्य कारण है। परिवारों में बच्चों की संख्या में कमी आ रही है, जिससे स्कूल जाने वाली कुल जनसंख्या प्रभावित हो रही है। साथ ही, शहरीकरण और आर्थिक विकास भी इस बदलाव को प्रभावित कर रहे हैं।
शिक्षा प्रणाली पर इस गिरावट का गहरा असर पड़ने की संभावना है। स्कूलों की बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित नीतियों में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। नीति निर्माताओं को इस जनसांख्यिकीय परिवर्तन के लिए पहले से ही तैयारी करनी होगी।