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भारत ने संयुक्त राष्ट्र के बकाया योगदान पर चिंता जताई, 2026 में नकदी संकट का अलर्ट
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के गंभीर तरलता संकट पर चिंता व्यक्त की है और सदस्य देशों द्वारा बकाया आकलन को 'अस्वीकार्य रूप से उच्च' बताया है। भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल के सलाहकार ने जोर दिया कि संविधान के तहत हर सदस्य देश को पूर्ण और समय पर योगदान देना अनिवार्य है।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा की पांचवीं समिति के 81वें मुख्य सत्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल के सलाहकार सुरेंद्र अधाना ने सोमवार को 'संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिति में सुधार' पर राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की तरलता स्थिति 2026 में संग्रहण में अनिश्चितताओं और कम नकद शेष के कारण चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
अधाना ने कहा, 'हम मानते हैं कि आकलित योगदान का पूर्ण, समय पर और बिना शर्त भुगतान हर सदस्य देश का संविधान से प्राप्त दायित्व है।' उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत इस दायित्व की पुनः पुष्टि की और देशों से आह्वान किया कि वे अपने वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करें।
भारत ने नियमित बजट में बकाया आकलन में सीमांत गिरावट को स्वीकार किया है, जो पिछले वर्ष 1.87 अरब डॉलर से घटकर 1.46 अरब डॉलर हो गया है। हालांकि, भारत का मानना है कि बकाया आकलन अभी भी अस्वीकार्य रूप से उच्च स्तर पर बना हुआ है, और 90 प्रतिशत से अधिक आकलन बकाया हैं।
भारत का यह रुख संयुक्त राष्ट्र के वित्तीय संकट को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है। सदस्य देशों के समय पर और पूर्ण भुगतान से ही वैश्विक संगठन अपने विभिन्न कार्यक्रमों और संचालन को सुचारू रूप से जारी रख सकता है।